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जैसा धन वैसा मन-motivational story in hindi

जैसा धन वैसा मन -ये कहावत यूँ तो युगों युगों से सुनते आ रहे हैं ।

लेकिन आज के दिन लाखों मनुष्य में से कोई एक इस पर गौर करते हैं ।

इनमे से भी बेहद कम जैसा धन वैसा मन को समझकर चरितार्थ होते हुए देख पाते हैं ।

जैसा धन वैसा मन को समझने के लिए अंग्रेजी के इस कहावत पर गौर करते हुए खुद पर अमल करके देखेंगे तो निश्चित रूप वास्तविकता स्पष्ट होकर प्रकट हो जाएगी ।

Where attention goes energy flows ,where energy flows things grows .

यानि ध्यान जहां जाता है ऊर्जा वहां प्रवाहित होता है ।

जहां ऊर्जा प्रवाहित होता है वहां चीज़ें बढ़ती है ।

जिससे वास्तविकता का अनुभव होता है ।

इसे इस कहानी के माध्यम से समझते हैं ।

व्यापारी का जैसा धन वैसा मन

किसी प्रान्त में एक व्यापारी था ।

ये जगह – जगह से फैक्ट्री के कचरा लेकर जमा करता था ।

फिर उसे दूसरे factory में Ricycling करके नए प्रोडक्ट को तैयार किया जाता है ।

फिर से लोहा बनाया जाता था । व्यापारी को धन कमाने की प्रबल लालसा थी ।

धन कमाने के हर तरह के जुगाड़ करने के लिए तैयार रहता था ।

मुनाफा कमाने के लिए अनुचित तरीका और अनुचित काम करने से पीछे नहीं हटता था ।

एक अर्थों में उस पर धन कमाने का नशा चढ़ा था ।

ज्यों-ज्यों आमदनी बढ़ रही थी और धन कमाने की भूख बढ़ती ही जा रही थी ।

इस तरह उसने अपार धन इकठ्ठा कर लिया ।

आलम यह था सेठ जी के घर में यत्र -तत्र ,जहां -तहाँ हर जगह धन ही धन दिखाई देता था ।

उसके पास कई नौकर -चाकर थे ।

पंडित जी को बुलावा

एक दिन एक पंडित जी को किसी विशेष पूजा-पाठके सम्बद्ध में राय लेने के लिए बुलाये थे ।

पंडितजी विद्वान होने के साथ -साथ ईमानदार ,परिश्रमी ,सरल स्वाभाव उनका आशीर्वाद देने की कला तथा बहुत अच्छे पंडिताई के लिए अपने इलाके में प्रसिद्ध थे ।

कई घंटों के विचार-विमर्श के बाद एक निश्चित तिथि को निर्धारित किया गया ।

रूपए का बंडल गायब- जैसा धन वैसा मन

अगले दिन जब व्यापारी अपने धन -संग्रह स्थल पर निगाहें दौड़ाई तो एक जगह से कुछ रूपये के बंडल गायब था ।

उसने अपने सभी स्टाफ और कर्मचारी से पूछा और खास करके उस कमरे में जिसका आना -जाना था ।

उससे सख्ती से पूछा लेकिन किसी ने कबूल नहीं किया।

तो फिर व्यापारी ने थाने FIR दर्ज करवाई और उस कमरे में आने वाले पर सख्ती से निपटने को कहा ।

क्योंकि उनका विश्वास था कि इन्ही लोगों ने लोग मेरा धन चुराया है ।

दूसरे दिन जब व्यापारी के घर पहुँचता है तो नजारा देखकर पंडित जी को मन में पीड़ा होती है ।

व्यापारी के कर्मचारी के साथ पुलिस निर्ममता से torture कर रहा था ।

पंडित जी ने विनम्रता पूर्वक पुलिस से पूछा इन लोगों का क्या दोष है ?

जबाब में बताया गया कि इन लोगों ने व्यापारी का धन चुराया है ।

पंडितजी ने आरोप को कबूलते हुए व्यापारी को धन वापस कर दिया ।

लेकिन व्यपारी ने पंडितजी से कहा कि आरोप अपने सर पर लेकर इसे बचाने कि कोशिश कर रहे हैं ।

पंडित जी का प्रश्न

पंडितजी से कहा कि मैं आप से एक बात पूछना चाहता हूँ ।

क्या आप जबाब देना चाहेंगे ?

हाँ -हाँ क्यों नहीं व्यापारी ने जबाब दिया ।

क्या आप इस धन को गलत तरीके से कमा कर इकठ्ठा किए हैं ?

व्यापारी आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा ये आप कैसे जानते हैं ?

पंडितजी ने जबाब दिए कि मैं सात्विक विचारधारा के व्यक्ति उस दिन से पहले तक कभी ऐसा कुकर्म और चोरी जैसा व्यभिचार कर्म नहीं किया था।

लेकिन उस दिन ये कहावत बिलकुल मेरे जीवन में प्रमाणित हो गया जैसा होगा धन वैसा होगा मन ।

आपके उस कमरा में जाते ही मेरे मन में तमाम गलत बातें उभरने लगा और आख़िरकार मैंने चोरी कर ही लिया ।

मैं इस धन को जैसे ही भोजन करने में खर्च किया ,कुछ ही मिनटों में मेरा स्वास्थय पूरी तरह विगड़ने लगा ।

और रास्ते में जो भी हुआ पूरा हाल सुनाया ।

जब मैं पूजाकक्ष गया तो मुझे एहसास हुआ कि मैंने कुकर्म किया है ।

इसे जल्दी से हमें वापस कर देनी चाहिए ।इसलिए वापस आया हूँ ।

हमें इस सत्य का ज्ञान हो गया कि जैसा धन होता है वैसा ही मन हो जाता है ।

जैसा धन वैसा मन के कहानी का संदेश

गलत धन का प्रभाव से मानसिकता पर गलत प्रभाव पड़ता है ।

अगर इसे कोई भी समझ कर अमल करते हैं तो उन्हें जीवन भर शारीरिक ,मानसिक ,सामाजिक ,आर्थिक ,पारिवारिक रूप से संतुष्टि का एहसास होगा ।

और खुद की आत्मा की शक्ति बेहद मजबूत हो जाएगी ।

फिर जो भी निर्णय लेंगे वह संतुष्टिदायक होगी ।

ऐसा करनेवाला हमेशा प्रसन्न रहेंगे ।

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