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motivational story in hindi : चीज़ों को अनदेखा भी करें – Ignore things

चीज़ों को अनदेखा भी करें

कुछ चीज़ों को अनदेखा भी करें ।ऐसा न हो कि चंद लम्हों का गुस्सा , नकारात्मकता आपसे सारे दिन की ताजगी और ख़ूबसूरती छीन ले ।

ऊर्जा शक्ति

ऐसी ही परिस्थितियों की व्याख्या करती है ये छोटी सी कहानी

जिसमे लोग अपने ही बनाये जाल में तो उलझ जाते हैं लेकिन उसे पता भी नहीं चलता है ।

परिणामस्वरूप अपनी ऊर्जा शक्ति को कुछ इस तरह नष्ट करता है ,सिवाय नुकसान के उसे कुछ मिलता ही नहीं है ।

प्रेमपूर्वक व्यवहार

एक गांव में एक गुरूजी रहते थे ।

गुरूजी अपने प्रेमपूर्वक व्यवहार और सहायता करने के नीति के कारण दूर -दराज के गांव तक काफी लोकप्रिय हो गए थे ।

गुरूजी हमेशा अपने पास आनेवालों के साथ मधुर व आशावादी वचनो के साथ – साथ सकारात्मक ढंग से प्रेरित करते थे।

अधिकतर लोगों की समस्या बातों -बातों में ही समाप्त हो जाती थी ।

परिणामस्वरूप आस- पास के इलाके में गुरूजी की धूम मची हुई थी ।

हर तरफ सिर्फ गुरूजी की चर्चा होती थी।

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श्रद्धालु को सही राह-चीज़ों को अनदेखा भी करें

एक दिन एक गांव के कुछ श्रद्धालु उनसे मिलने के लिए आये ।

और उनसे अनुरोध करने लगे कि वो हमारे गांव में सभा करें और श्रद्धालु को सही राह दिखाएं ।

नियत समय पर गुरूजी सभास्थल पर पहुँच गए । अधिकतर श्रद्धालु तो वहां उपस्थित था ।

लेकिन गांव के सरपंच और उनके कुछ समर्थक सभा में देर से पहुंचे ।

सरपंच के मुख क्रोध से तमतमाया था ।

गुरूजी को उनके शिष्य ने धीरे से कान में बताया कि सरपंच का पड़ोसी से झगड़ा हो गया है ।

वे इसी कारण से सभा में देर से पहुंचे हैं ।

गुरूजी ने सरपंच से इस बारे में कुछ नहीं पूछा और प्रवचन देना शुरू कर दिया ।

सभा में उपस्थित श्रद्धालु से उन्होंने पूछा -अगर आपके पास 86400 रूपये हैं ।

उनमे से कोई चोर दस रूपये निकालकर भाग जाए तो आप क्या करेंगे ?

क्या आप उसस्के पीछे भागकर चोरी गए दस रूपये वापस पाने की कोशिश करेंगे ?

या बचे हुए 86390 रूपये को हिफाजत से लेकर अपने रास्ते पर चलते रहेंगे ।

सबने एक स्वर में कहा की हम दस रूपये की तुच्छ राशि की अनदेखी करते हुए अपने बचे पैसे लेकर अपने रास्ते पर चलते रहेंगे ।

कथनी और करनी में अंतर

प्रश्नकर्त्ता गुरूजी ने कहा , ‘ आपलोगों के कथनी और करनी में अंतर हैं ।

मैंने देखा हैं की ज्यादातर लोग दस रूपये पाने के लिए चोर का पीछा करते हैं ।

और तब अपने बाकी के 86390 रूपये से भी हाथ धो बैठते हैं ।’

हैरान होकर सभी पूछने लगे , गुरूजी ये असम्भव हैं ,ऐसा कौन करता है ?

तब गुरूजी ने कहा -ये 86400 वास्तव में हमारे जीवन के एक दिन के समय का कुल सेकंड है ।

हममे से हरेक आदमी आये दिन किसी से दस सेकंड के बात को लेकर झगड़ा ,वाद- विवाद ,मतभेद या अन्य परिस्थितियों के बारे विचार करते हुए ईर्ष्या ,जलन और गुस्सा करके गुजार देते हैं ।

फिर हमारे बचे हुए 86390 सेकंड भी नष्ट हो जाते हैं ।इसलिए हमें कुछ चीज़ों को अनदेखा करना चाहिए

संदेश

हम सबको अपने आस – पास के लोगों के साथ किसी भी तरह के मतभेद ,झड़प ,ईर्ष्या ,अन्य लोगों के कार्यों से मन में उपजे गुस्सा के विचार को जल्दी से वहीं खत्म कर देना चाहिए ।

इसके बजाय सकारात्मक और जरूरी कार्यों पर ध्यान केंद्रित करेंगे तो वर्तमान से हमारा भविष्य बेहतर हो सकता है ।

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