Happiness – ख़ुशी एक भावना है ।-thought in hindi for life

Happiness : ख़ुशी एक भावना है । आत्मा का एक प्राकृतिक गुण है इसलिए इसे आंतरिक रूप से ही महसूस की जाती है ।मेरा मानना है कि ख़ुशी ही जीवन का वास्तविक सौंदर्य है ।

Happy emotion

Happiness ख़ुशी एक भावना है । जिसे हम किसी मनपसंद वस्तु को देखकर करते हैं ।

मन के अनुकूल बातों को सुनकर ,मन के अनुकूल दूसरे व्यक्ति के द्वारा व्यक्त भावना को महसूस करते हैं ।

किसी मनोनुकूल परिस्थितियों में आत्मा से जिस भावना की रचना (create ) करते हैं उस भावना के कारण हमारे चेहरे पर मुस्कुराहट दिखाई देती है ।

और हमारे शरीर के रोम- रोम खिल जाते हैं ,चेहरे की त्वचा का फैलाव होने लगता है ।

तब चेहरे की इस expression को सामने वाला व्यक्ति जो पुकारता है उसे Happy soul कहते हैं ।

दुनियाभर के अधिकतर लोग ख़ुशी प्राप्त करने के लिए हर वो काम करना चाहता है जिससे ख़ुशी प्राप्त हो सके ।

यानि लोग चीज़ों को खरीदकर , ज्यादा से ज्यादा धन उपार्जित करके , अपने परिवार को मनचाही वस्तु भेंट करके या दान-पुण्य करके happiness को हासिल करना चाहता है ।

भावना के जाल में आत्मा

Happiness को हासिल करने के लिए संसार के सभी मनुष्य बुरे काम करने से भी परहेज नहीं करता है ।इस प्रयास में काम ,क्रोध ,मोह ,लोभ ,तृष्णा ,अहंकार (igo ) जैसी भावना का इस्तेमाल करता चला जाता है ।

फिर ख़ुशी को प्राप्त करने के लिए जितना इन भावना का इस्तेमाल करता जाता है । उतना ही इस भावना के जाल में फंसता चला जाता है ।

ख़ुशी के विपरीत भावना का अनजाने में अभ्यास करने के कारण मनुष्य खुशियों (Happiness) से दूर होता चला जाता है ।

ख़ुशी और प्रसन्नता के बजाय तनाव ,बीमारी , परिवार से अलगाव और एकाकी जीवन जीने को अभिसप्त हो जाता हैं ।

आत्मा के सात गुण में से ख़ुशी एक प्रमुख गुण है ।ये गुण ईश्वर द्वारा सभी आत्मा को प्रदान की जाती है ।

लेकिन इसे लाखों में से कुछ ही आत्मा इस्तेमाल कर पाते हैं ।इसे हम एक उदाहरण से समझ सकते हैं – ध्यान से अपने घर में रखे अलमीरा को गौर से देखने की कोशिश करें तो पता लगेगा कि जिस चीज़ का आप लगातार इस्तेमाल कर रहे होंगे वही ऊपर से होगा । जो चीज़ें बिलकुल नहीं इस्तेमाल हो रहा है वो सबसे नीचे होता है ।

ठीक इसी तरह जिस विचार और व्यवहार को हम जितना ज्यादा प्रयोग में लाते हैं , वह उतना ही ज्यादा बढ़ता चला जाता है ।

इसी तरह जिस विचार और व्यवहार को जितना कम प्रयोग में लाते हैं , वह उतना ही और कम होता चला जाता है ।इसलिए हम पर पूरी तरह निर्भर करता है कि किस विचार और व्यवहार का प्रयोग करें और किसको छोड़े ।

Happiness – ख़ुशी एक भावना है ।

कुछ इसी तरह हम ख़ुशी को बेहद कम उपयोग कर पाते हैं ,जो आत्मा के नैसर्गिक गुण है ।

लेकिन जिस तरह फूल किसी भी स्थिति में खुशबू ही देता है । चाहे आप उसे कहीं रख दें ,कहीं देखें , कहीं भी महसूस करें वो हमेशा खुशबू ही देता है ।ठीक फूलों की तरह हमें हमेशा खुश रहना चाहिए ।

ख़ुशी की भावना को अंदर से महसूस करना जीत जीत की भावना को प्रदर्शित करता है ।

हम सबके मन में ये प्रश्न उभर कर आता है , लेकिन क्या हमेशा ख़ुशी को बरकरार रखना सम्भव है

हाँ ,मेरा मानना है कि ये सम्भव है , फिर प्रश्न उठता है कैसे ?

अगर खुद पर या अन्य किसी भी व्यक्ति के जीवन पद्धति पर गौर करेंगे तो पता चलेगा कि आमतौर पर हर आदमी एक लक्ष्य बनाता है या कोई इच्छा पूर्ति करने की कोशिश करता है

।ऐसा लोग क्यों करता है , क्योंकि इससे पैसा मिलेगा ,सम्पति हासिल होगी ,नाम ,फेम ,सम्मान मिलेगा ।

फिर ये पैसा ,सम्पति ,नाम ,फेम ,सम्मान क्यों चाहिए ? क्योंकि ये सब मिलने से अच्छा परिवार मिलेगा ,समाज में रुतबा बढ़ेगा , अच्छा पद मिलेगा ।

इन सब चीज़ों को हासिल करने से क्या मिलेगा ? अन्तोगत्वा इन सब चीज़ों से ख़ुशी मिलेगी ।

चीज़ें हमें क्या देती है । और कैसे ?

जरा सोचिये ! क्या चीज़ें पैसा ,सम्पति ,नाम ,फेम ,सम्मान ,पद , गरिमा हमें ख़ुशी देती है ? नहीं ।

जरा विचार करिये चीज़ों में ख़ुशी होती है ।पैसा के पास खुशी होती है ।सम्पति के पास ख़ुशी होती है ।सम्मान ,पद गरिमा के पास ख़ुशी होती है ।

मान लीजिये आपने एक मोबाइल ख़रीदा या किसी ने आपको गिफ्ट किया । तब आप कहते हैं या कह सकते हैं कि हमें ख़ुशी हुई ।आपके अनुसार मोबाइल के पास ख़ुशी हैं

।लेकिन अगर यही मोबाइल किसी दर्द से पीड़ित व्यक्ति को दें जो मरणासन्न स्थिति में हैं तो क्या वह खुश होगा ?

मोबाइल के पास ख़ुशी नहीं है ।

अगर जबाब नहीं हैं तो तो उस बीमार व्यक्ति को मोबाइल ख़ुशी क्यों नहीं दे सकता हैं ।क्योंकि मोबाइल के पास ख़ुशी नहीं है ।

दूसरी परिस्थिति में आपने अपनी समझ के अनुसार बिलकुल नई लांच मोबाइल ख़रीदा ।आप इसे खरीदकर बेहद खुश हैं ।

लेकिन दूसरा व्यक्ति आपके मोबाइल को देखता हैं और कहता हैं कि इसका फीचर अच्छा नहीं हैं ,डिस्प्ले अच्छा नहीं हैं ,कैमरा अच्छा नहीं हैं ,प्रोसेसर कमजोर हैं ।

सोचिये क्या तब भी आपके चेहरे पर happiness बरकरार रहेगी ।फौरन ही सोच में पड़ जायेंगे और सम्भव है कि पश्चाताप के साथ दुःख प्रकट करेंगे ।

चीज़ें अपना performance हरेक को समान रूप से देगी ।

मोबाइल performance और communication देती हैं जो किसी के पास जाने पर दे सकती हैं।

चीज़ें अपना performance हरेक को समान रूप से देगी ।

इसी तरह पैसा से कोई भी व्यक्ति कोई भी चीज़ और भौतिक सुविधा को हासिल कर सकता हैं । लेकिन सेहत, प्रेम, ख़ुशी ,सम्मान (Respect ),शांति को नहीं खरीद सकता हैं ।

इससे स्पष्ट होता हैं कि चीज़ों के पास ख़ुशी नहीं होती हैं बल्कि ख़ुशी को हम अपने सोच और भावना में निर्माण करते हैं ।

ठीक इसी तरह पैसा बीमार व्यक्ति को खुशी नहीं दे सकता ,सम्पति सन्यासी को ख़ुशी नहीं दे सकता ।इसी तरह सम्मान ,पद और रुतबा खुशी नहीं दे सकता हैं ।

ख़ुशी का अनुभव कब और कैसे होती हैं ?

जब इन सब चीज़ों या परिस्थितियों पर गौर करेंगे या गौर करने की कोशिश करेंगे तो पता चलेगा की इन सब चीज़ों को प्राप्त करने पर जो ख़ुशी का अनुभव करते हैं ।

दरअसल इन सब चीज़ों को प्राप्त करने पर ख़ुशी होती नहीं है बल्कि हम ख़ुशी को अंदर से भावना में create (निर्माण ) करते हैं ।

सकारात्मक सभी अच्छे -अच्छे विचार ,सपने ,व्यवहार ,प्रेम ,आशीर्वाद ,पवित्रता ,सच्चाई का भाव का निर्माण करने लगते हैं ।

जब ऐसे सकारात्मक विचार मन में आते है तब मानव के जो आत्मीय व्यवहार चेहरे पर झलकता है । जिसमे चेहरे के रोम- रोम खिल जाता है ।जिसे दुनिया के लोग ख़ुशी आत्मा कहते हैं ।

लेकिन सिक्के के दूसरा पहलू भी होता है । जब वही व्यक्ति जरा सा भी लोभ ,मोह ,काम ,क्रोध ,अहंकार ,तृष्णा ,स्वार्थ ,ईर्ष्या ,अव्यवहारिक व्यवहार इत्यादि जैसे नकारात्मक विचार से ग्रसित होते हैं।

तब जो चिंता चेहरे पर झलकता हैं । उसके चेहरे के रोम- रोम सिकुड़ जाते हैं ।जिसे दुनिया के लोग दुखी आत्मा कहते हैं ।

Happiness एक भावना है । ख़ुशी को हम अंदर से create करते हैं ।

एक और उदाहरण से इसे समझते हैं ।कोई व्यक्ति अपने दो बच्चे को एक ही रंग और डिज़ाइन का कपड़ा गिफ्ट करता हैं ।उनमे से एक बच्चा कपड़े के रंग और डिज़ाइन को देखकर काफी ख़ुशी प्रकट करता हैं ।जबकि दूसरा बच्चा उस कपड़े को पसंद नहीं करता हैं बल्कि दुःख प्रकट करते हुए लेने से इंकार करता हैं ।

कपड़ा एक रंग एक डिज़ाइन और एक कीमत वाली थी ।लेकिन दोनों को ख़ुशी क्यों नहीं हुई ? क्योंकि कपड़े के पास ख़ुशी नहीं थी ।बल्कि एक सकारात्मक विचार के कारण ख़ुशी को प्रकट कर सका जबकि दूसरे ने नकारात्मक विचार के कारण दुःख प्रकट किया ।

वास्तव में चीज़ें, पैसा ,पद के पास ख़ुशी नहीं होती हैं लेकिन हाँ ये ख़ुशी create करने के कारण हो सकते हैं । इसलिए हम ख़ुशी को हम अंदर से create करते हैं ।इस तरह हम Happiness ख़ुशी आत्मा से खुद को खुशियों से सरोबार करते हैं ।

ख़ुशी एक भावना है ।हर रोज़ नहीं बल्कि हर पल चाहिए ।

मुझे जीवन में हमेशा वो परिस्थितियां नहीं मिलेगी जो मेरी faovourable है ।मुझे खुद को तैयार करना होगा कि हर परिस्थिति में चलते हुए ,मैं कैसे अपनी सोच और नजरिये को बदलते हुए खुश रहने का तरीका सीखूं ।अगर मुझे ख़ुशी रोज और हर पल चाहिए ।

अब हम लोग विचार करते हैं कि ख़ुशी कब चाहिए और कितना चाहिए ? मझे उम्मीद हैं कि हममे से अधिकांश लोग कहेंगे कि ख़ुशी हर रोज़ नहीं बल्कि हर पल चाहिए । मगर कैसे ?

भीड़ में फंसा दो व्यक्ति कि अलग -अलग सोच

इसी के मद्देनजर हम लोग एक दृश्य की कल्पना करते हैं । जिसमे हम एक लक्ष्य तय करते हैं की हमें एक साल में निश्चित जगह पर जाना हैं ।ये लक्ष्य दो आदमी एक साथ तय करते हैं । दोनों के लिए एक समान परिस्थिति ,एक समान तरीके ,एक समान उपकरण उपलब्ध हैं ।

परिस्थिति ऐसा है की दोनों जहां है वहां मेला लगा है , भीड़ इतनी की चींटी भी निकलने में सक्षम नहीं हो ।दोनों को ट्रैन पकड़ने के लिए मेला के उस पार जाना है ।दरवाजा सिर्फ एक है ।समय मात्र आधा घंटा बचा है ।दोनों व्यक्ति निकलने की कोशिश करते हैं ।

उनमे से एक व्यक्ति भीड़ से निकलते वक़्त जो कुछ भावना उनके मन में उमड़ रही है ।

वो कुछ इस तरह है कि मेला कितना खूबसूरत जगह पर लगा है । मेला में हर चीज़ कितना उत्कृष्ट है ।मेला में नए नए लोग बच्चे ,बूढ़े, जवान हर तरह के लोग आये हैं ।

उनमे से अधिकतर काफी खुश दिखाई पड़ते हैं ।खुद तो इतना खुश है कि मानो उसे लग रहा है कि स्वर्ग में घूम रहे हैं ।

सब कुछ उसे अद्भुत दिखाई पड़ रहा था । इस तरह अंदर से इतना खुश था कि उसे पता ही नहीं चला कि गेट तक पहुंच गए हैं

कैसे निकलेंगे इस भीड़ से ?

वहीं दूसरा व्यक्ति मेला में भीड़ को देखकर अफ़सोस कर रहा था । कैसे निकलेंगे इस भीड़ से ।

मन ही मन मेला को ,भीड़ में आये लोगों को कोसने लगा । वो सोच रहा था मेला में तो कुछ खास तो है नहीं ।न कुछ बहुत खूबसूरत जगह है , न इसे बहुत खूबसूरत बनाया गया है ।

इस भीड़ में छोटे बच्चे को नहीं लाना चाहिए ।हो सकता है, किसी के साथ बुरा हो जाये ।इसी तरह अपशकुन की बातें उसके मन में आ रहा था ।

भीड़ में से निकलना जितना मुश्किल हो रहा था ।उतना ही भीड़ को कोसे जा रहा था ।कई तरह की भय सताने लगा था ।ट्रैन छूटने का डर ।साथी से बिछुड़ने का डर और कई अनजाने डर से भयभीत हो रहा था ।

आखिरकार भीड़ से बाहर निकला तो साथी से भी डर की ही बाते कर रहा था ।

दोस्त के चेहरे पर मुस्कान

तभी उसके साथी ने गौर किया की ये हर बात नकारात्मक ही क्यों बोलता है ।चेहरा तनाव से घिरा था ।साथी ने सबसे पहले खा अब आप रिलैक्स हो जाएँ क्योंकि अब हमलोग ट्रैन में बैठ गए हैं ।

फिर धीरे से दोस्त के भावना को बदलने के लिए दोस्त से पूछा -आपको मेला में सबसे अच्छा क्या लगा ?
दोस्त के चेहरे पर मुस्कान लौटी ।फिर उसे जो भी अच्छा लगा उसे इतना बेहतरीन ढंग से कहानी बनाकर पेश किया कि वह आश्चर्य से चकित रह गया ।

तब उसने दोस्त से कहा- जैसा अभी आप महसूस कर रहे है ,मेला में भी ऐसा ही महसूस कर सकते थे ।अगर आप जैसा अभी सोच रहे हैं वैसा ही उस समय में सोचते तो ।हालाँकि यह आप अनजाने में कर रहे थे ।

तब उसके दोस्त ने महसूस किया बात तो सही है । उसने स्वीकारते हुए कहा- Happiness – ख़ुशी एक भावना है ।जब भी हम किसी चीज़ के बारे में नकारात्मक सोचते हैं तो मन दर्द से तड़पने लगता हैं ।

हर तरफ मुश्किल ही मुश्किल दिखाई देता है और खुशियां गायब हो जाती है ।लेकिन ज्यों ही सकारात्मक बाते सोचते हैं तो हर तरफ अच्छाई ही अच्छाई दिखाई देता है ।तब हम खुशियों से भरे होते हैं ।

Happiness – ख़ुशी एक भावना है ।ख़ुशी हमेशा बरकरार रहेगी ।

इसलिए हम कह सकते हैं कि हम हमेशा Happiness ख़ुशी आत्मा रहें या किसी भी लक्ष्य ,चीज़ को प्राप्त करके खुश हो ।

यह हमारे खुद के choice है कि हम नकारात्मक चीज़ें के बारे में सोचें जो हमेशा दुःख , तनाव को बढ़ाता है या हमेशा ,हर पल खुश रहने के लिए सिर्फ व सिर्फ सकारात्मक बातें ही सोचें ताकि हम हर क्षण खुशियों का आनंद उठा सकें ।

हालाँकि ये सम्भव नहीं है कि जिस समय से प्रयोग शुरू करेंगे उसी समय से ख़ुशी हमेशा बरकरार रहेगी ।

सबसे पहले हमें अवचेतन मन (subconcious mind ) को बताना होगा ताकि हमें बार बार याद दिला सके ।

पहला दिन शायद एक दो बार ही याद आएगा ।दूसरा दिन उससे ज्यादा बार याद आएगा ।इस तरह दिन ब दिन अभ्यास करने से बढ़ता चला जाएगा ।

फिर एक दिन ऐसा भी आएगा कि इसे याद रखने की जरूरत भी नहीं होगा ।यह स्वतः ही व्यवहार में आने लगेगा ।इस तरह कोई भी व्यक्ति हमेशा खुश रहते हुए जीवन का आनंद उठा सकता है ।

इन्हें भी पढ़ें : कुछ चीज़ों को अनदेखा न करें ।
: अंतिम निर्णय
:नेताजी सुभाषचंद्र बोस एक ओजस्वी वक्ता

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